Kamarajar Essay in Hindi 100, 150, 200, 300, 500 Words

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Kamarajar Essay in Hindi

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Kamarajar Essay In Hindi 100 words 

भारत के इतिहास में कई सारे स्वतंत्रता सेनानियों का नाम सुनहरे अक्षर में लिखा गया है। इन सभी महान स्वतंत्रता सेनानियों में से एक स्वतंत्रता सेनानी कुमार स्वामी कामराजार भी हैं। कामराजार एक स्वतंत्रता सेनानी एवं प्रसिद्ध कांग्रेसी नेता भी रह चुके हैं। कुमार स्वामी कामराजार का जन्म 13 जुलाई 1903 को तमिलनाडु में हुआ था। कामराजार बचपन से ही राजनीति के प्रति रुझान रखते थे।

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उन्होंने 18 वर्ष की आयु से ही राजनीति करना प्रारंभ कर दी। 1919 में जलियांवाला बाग हत्याकांड होने के बाद उन्होंने कांग्रेस पार्टी के साथ जोड़कर स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी। कामराजार को 1954 और 1963 में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में भी चुना गया था। 1976 में कामराजार को भारत के सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान अवार्ड भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

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Kamarajar Essay In Hindi 200 words

कामराजार एक काफी कुशल नेता थे। वे अपने लोगों की काफी परवाह करते थे। कामराजार काफी महान व्यक्तित्व के व्यक्ति थे, इसीलिए देश के करोड़ों लोग उन्हें अपना प्रेरणा स्त्रोत भी मानते हैं। कामराजार का जन्म 1903 में भारत के दक्षिण क्षेत्र के तमिलनाडु में हुआ था। उनका जन्म एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उन्होंने बचपन से ही काफी आर्थिक समस्याओं का सामना किया था। कामराजार को पढ़ाई करने का काफी शौक था। उन पर शिक्षा प्राप्त करने का इतना जुनून था, कि उन्होंने काफी जल्दी अपनी प्रारंभिक शिक्षा स्वयं पूरी कर ली।

कामराजार का मानना था, कि शिक्षा एक ऐसी चीज है, जो व्यक्ति का जीवन पूरी तरह बदल सकती है। इसलिए उन्होंने एक राजनेता बनकर शिक्षा ग्रहण करने वाले बच्चों के लिए काफी सारी सुविधाएं उपलब्ध कराई। कामराजार ने शिक्षा ग्रहण करने वाले बच्चों के लिए विद्यालय में मध्याह्न भोजन योजना की शुरुआत की। कामराजार ने 20 साल की उम्र में कांग्रेस के साथ जुड़ कर स्वतंत्रता की लड़ाई शुरू की उन्होंने असहयोग आंदोलन में भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया। के.कामराजार ने तमिलनाडु के विकास में एक अहम भूमिका निभाई है, इसलिए उन्हें किंग मेकर के नाम से भी जाना जाता है।

 

Kamarajar Essay in Hindi
Kamarajar Essay in Hindi\

Essay on Kamarajar in Hindi 300 words

प्रस्तावना

तमिलनाडु के विदुरनगर में जन्मे के. कामराजार को आज सारे भारत में जाना जाता है। भारत के छोटे से राज्य के छोटे से शहर में जन्म लेने के बाद भी उन्होंने अपनी मेहनत और दृढ़ निश्चय से एक अलग पहचान बनाई है। के. कामराजार ने स्वतंत्रता की लड़ाई में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दिया है। के. कामराजार जैसा इमानदार और उच्च व्यक्तित्व का धनी नेता सदियों में एक बार जन्म लेता है। कामराजार ने तमिलनाडु के लोगों का विकास करने के लिए काफी सारी योजनाएं भी चलाई है। उन्होंने तमिलनाडु में लोगों को मुफ्त शिक्षा और रोजगार के साधन भी उपलब्ध कराए हैं।

कामराजार का राजनीतिक जीवन

कामराजार के राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1930 से हुई। जलियांवाला बाग हत्याकांड से प्रभावित होकर उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलनों में एवं रैलियों में हिस्सा लेना प्रारंभ कर दिया। सन 1930 में स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ने वाली कांग्रेस कमेटी से जुड़कर के. कामराजार ने स्वतंत्र की लड़ाई का नेतृत्व करना प्रारंभ कर दिया गया। कई स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा उन्हें अपना नेता भी बनाया गया। उनकी देशभक्ति देखते हुए 1940 के दशक में उन्हें कांग्रेस द्वारा तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के रूप में चुना गया। 1950 में कामराजार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने उन्होंने मुख्यमंत्री बनने के बाद तमिलनाडु में शिक्षा के क्षेत्र में, और रोजगार के क्षेत्र में काफी बदलाव किए। उन्होंने तमिलनाडु के लोगों के लिए कई सारी अच्छी योजनाएं बनाई, एवं तमिलनाडु निर्माण का नया ढांचा तैयार किया।

निष्कर्ष

कामराजार एक ऐसे नेता थे, जो लोगों की सेवा करना अपना परम धर्म समझते थे। वे हमेशा लोगों की परेशानियां सुनते थे, और उनका समाधान भी करते थे। तमिलनाडु में शिक्षा और रोजगार की काफी कमी थी, इसलिए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त होने के बाद उन्होंने सबसे पहले तमिलनाडु के शिक्षा क्षेत्र में बदलाव किया। कामराजार ने तमिलनाडु के लोगों के लिए रोजगार के साधन भी उपलब्ध कराएं। उन्होंने अपने कार्यकाल में कई सारी अच्छी नीतियां बनाकर शिक्षा, स्वास्थ्य, सेवा के बुनियादी ढांचे में सुधार किया। उनके इन्हीं महान कार्यो के कारण उन्हें भारत रत्न जैसे पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।

Essay on Kamarajar in Hindi 500 words

प्रस्तावना

भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी कामराजार का जीवन लाखों लोगों को प्रेरित करता है। उन्होंने अपने जीवन में कई सारी कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन देशभक्ति कभी नहीं छोड़ी। के. कामराजार को तमिलनाडु का महानायक भी माना जाता है। तमिलनाडु राज्य में बदलाव लाने वाले एकमात्र नेता कामराजार थे। कामराजार ने अपने जीवन की शुरुआत स्वतंत्रता सेनानी के रूप में की थी बाद में वह तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बनकर समाज सेवक के रूप में लोगों के सामने आए। कामराजार ने कांग्रेस के साथ मिलकर स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी, एवं देश को स्वतंत्र कराने के बाद तमिलनाडु के विकास में जुट गए।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

के. कामराजार का जन्म एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था। उनका जन्म तमिलनाडु के विधुर नगर में कुमार स्वामीनगर के घर हुआ था, जो कि पेशे से एक व्यापारी थे। कामराजार की माता का नाम शिवकामी अम्मियार था। प्रारंभिक शिक्षा के लिए कामराजार का 1907 में पहली बार स्कूल में दाखिला कराया गया। इसके बाद कामराजार को 1909 में विरुदुपट्टी हाई स्कूल में भर्ती कराया गया। जब कामराजार 6 वर्ष के थे, तब उनके पिता की मृत्यु हो गई। उसके बाद उन्होंने अपने घर की आर्थिक स्थिति देखते हुए 1914 में स्कूल छोड़ दिया। उन्होंने एक दुकान में काम करना प्रारंभ किया एवं छठी कक्षा तक शिक्षा ग्रहण करने के बाद आगे की शिक्षा के लिए स्वयं से अध्ययन करना शुरू कर दिया। 

कामराजर की राजनीतिक यात्रा

ब्रिटिश शासन द्वारा भारतीय लोगों पर काफी अत्याचार किया जा रहा था। जलियांवाला बाग हत्याकांड ने कामराजार को इतना प्रभावित किया, की उन्होंने भारत को ब्रिटिश राज्य से आजादी दिलाने का फैसला कर लिया। मात्र 15 वर्ष की उम्र से उन्होंने तमिलनाडु में कांग्रेस पार्टी द्वारा चलाए गए स्वतंत्रता आंदोलनों में हिस्सा लेना प्रारंभ कर दिया। वह तमिलनाडु में कांग्रेस पार्टी के लिए धन एकत्रित कर आंदोलनों को बढ़ावा देते थे। कामराजार को 1937 में मद्रास विधानसभा के लिए चुना गया 1952 में चुनाव होने पर उन्होंने लोकसभा की सीट जीती। इसके बाद 1954 से 1963 तक वे मद्रास के मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त किए गए।

शिक्षा के क्षेत्र में योगदान

कामराजार शिक्षा का महत्व जानते थे। उनका मानना था कि शिक्षा व्यक्ति को गरीबी से दूर कर सकती है। उन्होंने तमिलनाडु में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई सारी योजनाएं शुरू की। उन्होंने शिक्षा प्राप्त करने वाले बच्चों में अधिकतर बच्चों को कुपोषण का शिकार देखा, इसलिए उन्होंने तमिलनाडु में मध्याह्न भोजन योजना शुरू की। इस योजना के अंतर्गत तमिलनाडु के सभी स्कूलों में विद्यार्थियों को खाना दिया जाने लगा। उनकी यह योजना काफी सफल हुई। इस योजना के माध्यम से बच्चे शिक्षा के प्रति जागरूक हुए, एवं कुपोषण में भी काफी कमी आई। सभी लोगों के लिए शिक्षा को सुलभ बनाने के लिए उन्होंने कई सारे स्कूल और कॉलेज चालू किए।

ग्रामीण गरीबों के लिए कार्य

कामराजार ने ग्रामीण गरीबों को सशक्त बनाने के लिए भी काफी कार्य किए। कामराजार का उद्देश्य था, कि उन्हें ग्रामीण गरीबों का उत्थान करना है। उन्हें शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के बीच का अंतर पूरी तरह खत्म करना है। कामराजार ने अपनी योजनाओं के माध्यम से किसानों एवं मजदूरों के जीवन को बेहतर बनाना शुरू किया। उन्होंने तमिलनाडु के जमीन जोतने वाले मजदूर जिनके पास जमीन नहीं थी, उन्हें योजना के माध्यम से पुनः जमीन वितरित की गई। कामराजार ने हमेशा ग्रामीण क्षेत्र में उद्योगों को बढ़ावा दिया। उन्होंने ग्रामीण उद्योगों का समर्थन किया एवं किसानों को उद्योग करने के लिए ऋण भी प्रदान किया।

तमिलनाडु का आर्थिक विकास

मद्रास के मुख्यमंत्री बनने के बाद कामराजार ने तमिलनाडु के विकास का काम शुरू किया। उन्होंने अपने कार्यकाल में तमिलनाडु में महत्वपूर्ण औद्योगिक संस्थाओं का विकास किया। कामराजार ने तमिलनाडु में उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा दिया, इसके अलावा बाहरी निवेश को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने तमिलनाडु के लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा किए। कामराजार शिक्षा और रोजगार का महत्व समझते थे, इसलिए उन्होंने सबसे पहले चेन्नई में भारतीय प्रौद्योगिक संस्था (आईटीआई) की स्थापना की नींव रखी। चेन्नई में स्थित भारतीय प्रौद्योगिक संस्था के निर्माण में कामराजार ने अहम भूमिका निभाई है, और इसे देश का एक प्रमुख इंजीनियरिंग संस्था बनाई है।

निष्कर्ष

कामराजार को उनकी सादगी विनम्रता और लोगों के प्रति सद्भावना के कारण तमिलनाडु के लोगों द्वारा काफी पसंद किया जाता था। एक महान नेता होने के बावजूद भी कामराजार हमेशा सार्वजनिक सेवा के प्रति समर्पित रहते थे। तमिलनाडु के विकास में कामराजार का योगदान सबसे अतुल्य माना जाता है। उन्होंने अपनी दूरदर्शी और कल्याणकारी नीतियों से देश के कई लोगों को लाभ पहुंचाया है। कामराजार ने तमिलनाडु के शिक्षा के क्षेत्र में काफी अहम योगदान दिया है। उनके इस योगदान के कारण उनके जन्मदिन को “शिक्षा विकास दिवस” के रूप में मनाया जाता है। भारत के इस प्रतिभाशाली नेता का निधन 2 अक्टूबर 1975 को चेन्नई में हुआ था।

Essay on Kamarajar in Hindi

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