Tribal Freedom Fighters Essay in Hindi: स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासियों का योगदान निबंध

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Tribal Freedom Fighters Essay in Hindi

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स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासियों का योगदान निबंध (Tribal Freedom Fighters Essay in Hindi) 300 Words

अंग्रेजों ने भारत पर 200 साल राज किया। शुरुआत में अंग्रेजों ने भारत पर सीधे तौर शासन नहीं किया था। उन्होंने अपनी कूटनीति और राजनीति का प्रयोग कर धीरे-धीरे भारत पर शासन करना शुरू किया। स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई अंग्रेजों के अत्याचार बहुत बढ़ने के बाद शुरू की गई जिसकी कहानी भारत जानता है। लेकिन अंग्रेजों का विरोध 1857 की लड़ाई से पहले ही किया जाना शुरू हो गया था। ये विरोध किया था आदिवासियों ने, जो 1857 की लड़ाई से कई पहले की बात है।

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अंग्रेजों ने शुरुआत में भारत के राजा, सामंतों और जमींदारों पर दबाव बनाना शुरू किया और अपनी हुकूमत जमानी शुरू की। आदिवासी वर्ग के लोग जरूरत पड़ने पर सामंतों और गांव के सेठों से उधार ले लिया करते थे, जो उन्हें भारी ब्याज दरों पर मिलता था। कई आदिवासियों के पास उस स्वयं की जमीन भी थी। लेकिन जब आदिवासी सेठ, सामंतों और जमींदारों का उधार चुकाने में असमर्थ होते थे, तो साहूकार अंग्रेजों के साथ मिलकर आदिवासियों की जमीन पर कब्जा कर लिया करते थे। इसके विरोध में आदिवासी आवाज भी उठाते थे और लड़ाई भी करते थे।

लेकिन अंग्रेजों के उस समय के आधुनिक हथियार और तोप-गोलों से लड़ना आदिवासियों के लिए बड़ा चुनौतीपूर्ण था क्योंकि आदिवासी अपने पारंपरिक तीर-कमान और हथियार से युद्ध लड़ा करते थे। जिसमें हजारों की तादात में आदिवासी मारे गए थे। अंग्रेजों द्वारा आदिवासियों से भारी कर भी वसूला जाता था, लेकिन ये कर सीधे तौर पर अंग्रेज न वसूल कर राजा और जमींदार वसूलते थे। आदिवासियों का विद्रोह जमींदारों, साहूकारों और राजाओं से था। भले ही आदिवासीयों का सीधे तौर पर अंग्रेजों से आमना-सामना न हुआ हो लेकिन आदिवासियों ने भी अप्रत्यक्ष रूप से अंग्रेजों के जुल्मों को सहा और उसका विरोध किया है। 

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प्रस्तावना

स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई हर एक आम भारतवासी की लड़ाई थी। जिसमें अंग्रेजों के जुल्म ने जात-पात, रंग रूप ऊंच-नीच या जगह अथवा क्षेत्र नहीं देखा गया। सभी ने अंग्रेजों के जुल्म और गुलामी का दुख सहा था, और सभी ने इसमें अपना पूर्णा योगदान देने का प्रयास भी किया। स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई एक ऐसी लड़ाई थी, जिसमें हर उम्र वर्ग के लोगों ने अपना योगदान दिया। इस लड़ाई में ऐसे कई नाम है, जो हर भारतवासी को मुंह जबानी याद है, लेकिन कुछ ऐसे भी योद्धा रहे और ऐसे भी लड़ाईयां रहीं, जो इतिहास में कहीं बिसरा दिए गए हैं। इस स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में आदिवासियों ने अपना एक अभिन्न भाग दिया है, और आजादी की लड़ाई लड़ी है, जो 1857 की लड़ाई से भी पहले की है। 

Tribal Freedom Fighters Essay in Hindi
Tribal Freedom Fighters Essay in Hindi
1857 से पहले की लड़ाई

भारत की आज़ादी की लड़ाई का अगर इतिहास उठाकर देखा जाए तो, हमें सन 1857 में स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई की शुरुआत बताई जाती है। सन 1757 में प्लासी का युद्ध हुआ था, जिसमें बंगाल के नवाब सिराज-उद-दौला को ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा हरा दिया गया और बंगाल में ब्रिटिश शासन की नींव रखी गई। वहीं सन 1961 में गोवा को पुर्तगालियों से मुक्त करवाने के बाद गोवा को भारत में विलय कर दिया गया।

अंग्रेजों ने अपनी हुकूमत के दौरान भारत के राजा, जमींदारों, साहूकारों और सामंतो द्वारा आदिवासियों को प्रताड़ित किया और उन पर हुकूमत की। जब आदिवासी साहूकारों से लिया हुआ कर्ज नहीं चुका पाते थे तो, साहूकार अंग्रेजों के साथ मिलकर उनकी ज़मीनों पर कब्जा कर लेते थे। अंग्रेजों द्वारा आदिवासियों से भारी कर भी वसूला जाता था लेकिन यह जमींदारों और राजाओं द्वारा करवाया जाता था। इसलिए आदिवासियों का विद्रोह सीधा अंग्रेजों से न होकर जमींदारों और सामंतों से था। 

स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासियों का योगदान

आदिवासियों ने भले ही सीधे तौर पर अंग्रेजों से सामना न किया हो लेकिन अंग्रेजों के साथ मिले हुए जमींदारों एवम शासकों का उन्होंने खुलकर विद्रोह किया। जो कहीं न कहीं अंग्रेजों के लिए एक चुनौती साबित हुआ था। आदिवासियों ने पारंपरिक साधनों जैसे तीन धनुष, भाले, कुल्हाड़ी और गदा से प्रशिक्षित पुलिस बल एवं अस्त्र-शस्त्र-बंदूकें, तोपें, गोला-बारूद और बारूद का सामना किया। आदिवासियों के पास एक और सबसे बड़ी समस्या थी, वो भी उनका समाज और समुदाय के तौर पर बंटना, जिसके कारण वे कभी एकत्रित होकर एक सामंतों और जमींदारों का विरोध न कर सकें। 

उपसंहार

हमनें हमेशा स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा दिए गए बलिदान स्वतंत्रता आंदोलनों की भारी कीमत आदिवासियों को चुकानी पड़ी। अंग्रेजों के पास बड़ी संख्या में सुसज्जित सेना थी। आधुनिक अस्त्र-शस्त्र-बंदूकें, तोपें, गोला-बारूद और बारूद थे। सामंतों के पास एक प्रशिक्षित पुलिस बल था। साहूकारों के पास धन का बल था।

इनकी तुलना में आदिवासियों के पास युद्ध के पारंपरिक साधन थे- तीन धनुष, भाले, कुल्हाड़ी और गदा। आदिवासी आर्थिक रूप से कमजोर थे। संसाधनों की कमी थी। इसलिए हर आंदोलन में आदिवासियों को जान-माल की भारी हानि उठानी पड़ी। अंग्रेजों से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से भारत के हर समुदाय, धर्म और जनजाति के लोगों ने सामना किया है, उन सभी का योगदान अतुलनीय है। 

Essay on Tribal Freedom Fighters in Hindi

हमारे सभी प्रिय विद्यार्थियों को इस “Tribal Freedom Fighters Essay in Hindi जरूर मदद हुई होगी यदि आपको यह स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासियों का योगदान निबंध अच्छा लगा है तो कमेंट करके जरूर बताएं कि आपको यह Tribal Freedom Fighters Essay in Hindi कैसा लगा? हमें आपके कमेंट का इंतजार रहेगा और आपको अगला Essay या Speech कौन से टॉपिक पर चाहिए. इस बारे में भी आप कमेंट बॉक्स में बता सकते हैं ताकि हम आपके अनुसार ही अगले टॉपिक पर आपके लिए निबंध ला सकें.

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